logo
add image

शिवराज छीनेंगे 'कमल' का ताज,या..! पुरी खबर

सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया कल 2 बजे होगा फ्लोर टेस्ट




दिल्ली। मध्य प्रदेश में जारी राजनीतिक संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया है।शीर्ष अदालत ने कहा कि कल शाम पांच बजे तक विधानसभा में शक्ति परीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए। अदालत ने फ्लोर टेस्ट की वीडियोग्राफी भी कराने को कहा। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि बागी विधायकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। राज्य के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की थी और कहा था कि 22 विधायकों ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है और सरकार अल्पमत में है लिहाजा फ्लोर टेस्ट कराया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश के स्पीकर को सुझाव दिया है कि क्या वह बागी एमएलए से विडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बात करेंगे। कोर्ट इसके लिए एक ऑब्जर्वर नियुक्त कर सकता है। हालांकि स्पीकर की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इस सुझाव को खारिज कर दिया।
दो दिन की लंबी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने फैसला दिया है कि विधानसभा में 20 मार्च को शाम के वक्त फ्लोर टेस्ट कराया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा है कि मीटिंग का एक सूत्री एजेंडा फ्लोर टेस्ट होगा। इसके लिए जो वोटिंग होगी वह हाथ उठाकर होगी। विधानसभा की कार्यवाही की विडियो रेकॉर्डिंग की जाएगी। संबंधित अथॉरिटी इस बात को सुनिश्चित करेगी कि फ्लोर टेस्ट के दौरान कानून व्यवस्था कायम रहेगी। फ्लोर टेस्ट पांच बजे शाम में होगी। राज्य के डीजीपी को निर्देश दिया गया है कि वह इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि बागी विधायकों को आने से न रोका जाए उन्हें पर्याप्त सुरक्षा दी जाए।

क्या बोले शिवराज?
फैसले के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि "आंतक, दबाव, लोभ, प्रलोभन के प्रयास में कमलनाथ जी बुरी तरह विफल रहे। इसमें दिग्विजय सिंह भी लगे थे। इसलिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को शिरोधार्य करते हैं। कल फ्लोर टेस्ट होगा। हाथ उठाके होगा। और हमारा विश्वास है कि अल्पमत की सरकार जाएगी।"

उन्होंने कहा, "ये जनता के साथ धोखा, विश्वासघात करने वाली सरकार है। मध्य प्रदेश को दलालों का अड्डा बनाने वाली, शराब माफियों द्वारा संचालित सरकार हैपरवहन माफिया, रेत माफिया सब सक्रिय थे। मजाक बना दिया था इन लोगों ने। रोज नियुक्तियां हो रही हैं। जब सरकार को समर्थन नहीं है। आज ऐसे अन्याय की पराजय हुई है। हमारा अटल विश्वास है करोड़ों जनता की दुआएं और आशीर्वाद हमारे साथ है।" शिवराज ने आगे कहा, "फ्लोर टेस्ट में ये सरकार पराजित होगी. नई सरकार बनने का रास्ता साफ होगा। हम माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का शीष झुकाकर अभिनंदन करते हैं. कल दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा।"

बेंगलुरु के विधायक आएंगे या नहीं, इसपर शिवराज ने कहा कि ये उनको तय करना है। उन्होंने कहा, "हमारे विधायक साथियों ने थोड़ा विश्राम किया है. अब बड़ी जिम्मेदारी आने वाली है। जनता की आह इस सरकार को ले डूबी। राज्यपाल का अभिभाषण था तब वे कैसे चिल्ला रहे थे.. जल्दी-जल्दी.. क्या हुआ। हमारे विधायक एकजुट हैं, किला मजबूत है।"

फैसले के बाद शिवराज सिंह चौहान का ट्वीट - सत्यमेव जयते
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि अदालत ऐसा माहौल सुनिश्चित करना चाहती है कि जिससे एमएलए से बात हो और बिना किसी दबाव में हो। इसके लिए बेंगलूर में ऑब्जर्वर रखा जा सकता है जो एमएलए से स्पीकर को विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जिरये जोड़ सकता है। कोर्ट स्पीकर को समयसीमा तय करके निर्देश देना चाहती है और संवैधानिक तौर पर ये सही नहीं है। वहीं सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सीएम मामले में साइड में बैठे हुए हैं और स्पीकर कोर्ट में राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे हैं।

गुरुवार को मध्यप्रदेश में फ्लोर टेस्ट कराए जाने को लेकर पूर्व सीएम व बीजेपी नेता शिव राज सिंह चौहान की अर्जी पर सुनवाई शुरू हुई। पढ़ें अपडेट्स।

स्पीकर के वकील अभिषेक मनु सिंघवी: सिर्फ फ्लोर टेस्ट का राग अलापा जा रहा है। जबकि स्पीकर के अधिकार में ये दखल है। दलबदल कानून के तहत पार्टी से अलग होने के लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए लेकिन इससे बचने का तरीका निकाला गया है और 16 लोगों को बाहर रखा जा रहा है ताकि सरकार गिर जाए। इन्हें नई सरकार में फायदा दी जाएगी। सदन की संख्या छोटी हो जाएगी और इन 16 को नई सरकार में फायदा दिए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट स्पीकर के विशेषाधिकार में दखल नहीं दे सकता। स्पीकर को अयोग्यता तय करने का अधिकार है। स्पीकर ने अयोग्य ठहरा दिया तो फिर वह मंत्री भी नहीं बन सकते इसलिए स्पीकर के फैसले से पहले फ्लोर टेस्ट की बात कही जा रही है। स्पीकर के लिए कोई समयसीमा तय नहीं होनी चाहिए। वह अपने हिसाब से समय तय करेंगे।

जस्टिस चंद्रचूड़: क्या अगर एमएलए विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बात करेंगे तो स्पीकर फैसला लेंगे?

सिंघवी: ऐसा नहीं होना चाहिए।

जस्टिस चंद्रचूड़: लेकिन संतुलन तो जरूरी है। एमएलए को इस्तीफा देने का पूरा अधिकार है और स्पीकर को फैसला लेने का अधिकार है लेकिन संतुलन जरूरी है।

सिंघवी: लेकिन विडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बात करने का मतलब ये निकलता है कि वो बंधक हैं। स्पीकर दो हफ्ते में इस्तीफा और अयोग्यता पर फैसला लेंगे। पहले फैसला लेने दिया जाए फिर फ्लोर टेस्ट हो।

जस्टिस चंद्रचूड़: आप इस तरह नहीं कह सकते कि फैसला को अभी रोकेंगे और ब्लेम भी करेंगे। हम इसके लिए माहौल दे सकते हैं। हम बेंगलूर में किसी जगह पर ऑब्जर्वर नियुक्त कर सकते हैं। ऑब्जर्वर आपसे कॉनेक्ट करेंगे ताकि आप विडियो कॉन्फ्रेंसिंग से एमएलए से बात कर सकें। मैं इस मामले में रास्ता निकलाने की कोशिश कर रहा हूं। ये देश की राष्ट्रीय समस्या है किसी राज्य तक की बात नहीं है।

सिंघवी: अगर एमएलए बंधक नहीं है तो फिर राज्यसभा प्रत्याशी दिग्विजय सिंह को उनसे मिलने क्यों नहीं दिया गया है। मैं एमएलए के बंधक में रखने की दलील पेश कर रहा हूं।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता: सीएम अलग बैठे हुए हैं और स्पीकर कोर्ट में राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे हैं।

सिंघवी: मैं इसका कानूनी तौर पर काउंटर करना चाहता हूं।

बागी एमएलए के वकील मनिंदर सिंह: वह कोर्ट के सुझाव से सहमत हैं।

जस्टिस चंद्रचूड़: मैं पूछता हूं कि अयोग्यता और इस्तीफे से फ्लोर टेस्ट का क्या रिलेशन है? फ्लोर टेस्ट को क्यों रोका जाना चाहिए।

सिंघवी: दरअसल इससे ये सुनिश्चित हो पाएगा कि बागियों व विश्वासघात करने वालों को क्या मिलने वाला है। अगर स्पीकर ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया तो वो पार्टी के व्हीप के दायरे में आ जाएंगे।

एमएलए के वकील सिंह: लेकिन व्हीप के बाद भी वह वोट क्यों देंगे। नहीं देंगे।

जस्टिस चंद्रचूड़: यानी स्पीकर ने अगर इस्तीफा स्वीकार नहीं किया और व्हीप का उन्होंने पालन नहीं किया तो वो अयोग्य हो जाएंगे?

सिंघवी: माय लॉर्ड एक केस का भी उदाहरण नहीं है जहां चलते हुए विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के लिए निर्देश जारी हुआ हो। (इस्तीफा वाले नियम को हिंदी में पढते हुए) क्या मायलॉड को कोई कोई दिक्कत तो नहीं।

जस्टिस चंद्रचूड़: बिल्कुल नहीं। बल्कि ये तो बहुत ही सुंदर भाषा है।

सिंघवी: कर्नाटक मामले में भी स्पीकर को इस्तीफे पर फैसला लेने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई थी।

जस्टिस चंद्रचूड़: लेकिन फ्लोर टेस्ट नहीं टाला गया।

सिंघवी: कर्नाटक में अविश्वास प्रस्ताव था इस मामले में भी लोग इसके लिए आगे आ सकते हैं तब स्पीकर नियम के हिसाब से प्रक्रिया तय करेंगे।

कमलनाथ के वकील कपिल सिब्बल: ये अनोखा केस है जिसमें पहली बार देखा जा रहा है कि गवर्नर फ्लोर टेस्ट के लिए कह रहा है। कोर्ट को संवैधानिक ढांचे को नष्ट करने वालों को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए।

जस्टिस चंद्रचूड़: हम कैसे बाध्य करें एमएलए को कि वह आपसे मिलें।

सिब्बल: आप दबाव नहीं दे सकते हैं लेकिन आप सुनिश्चित करें कि वो जहां जाना चाहें जा सकते हैं।

पूर्व शिवराज सिंह की ओर से पेश मुकुल रोहतगी: कांग्रेस चाहती है कि अविश्वास प्रस्ताव आए। और इस पर दो तीन हफ्ते बहस चले और इस दौरान हॉर्स ट्रेडिंग चलती रहे। इनको समय इसीलिए चाहिए। ये लोग कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहे हैं। कोर्ट से जानकारी साझा नहीं कर रहे हैं।

16 एमएलए की ओर से मनिंदर सिंह: 6 मिनिस्टर का इस्तीफा स्वीकार हुआ और 16 एमएलए का नहीं। जबकि मिनिस्टर भी पेश नहीं हुई थे फिर अंतर क्या है।
सिंघवी: हम दो हफ्ते का वक्त मांग रहे हैं ताकि उस पर फैसला हो सके।
हम इसके लिए तैयार हैं।जीतू पटवारी
मध्यव प्रदेश में 20 मार्च को फ्लोर टेस्ट करवाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर मंत्री जीतू पटवारी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हम इसके लिए तैयार हैं।जीतू पटवारी के अनुसार हम इसके लिए पहले से ही तैयार थे। इस बात को मुख्यएमंत्री कमल नाथ पहले भी खुद ही कह चुके हैं। यह भी आवश्यमक है कि जिन विधायकों को बंधक बनाकर रखा गया है वे भी उपस्थित रहें। वहीं मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि हम भी फ्लोर टेस्टज की बात कह रहे थे। विधायक दल की बैठक में हम अपनी रणनीति तय करेंगे।

Top