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होली पर अद्भुत संयोग, गजकेसरी योग में होगा होलिका दहन

जिलें में होगा 150 स्थानों पर होली का दहन

नीमच। पूरे देश में होली 2020 की धूम है। होली के रंगों का खुमार धीरे-धीरे लोगों पर चढ़ रहा है. इस बार मंगलवार 10 मार्च को होली महोत्सव मनाया जाएगा. होली से पहले होलिका दहन मनाया जाता है. होलिका दहन होली की पूर्व संध्या पर मनाया जाता है. होलिका दहन इस बार सोमवार 9 मार्च को मनाया जाएगा. हिंदुओं का दीपावली के बाद होली सबसे बड़ा त्योहार है. हिंदू धर्म की संस्कृति और सभ्यता उनके त्योहारों में झलकती है.धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं के बीच जिले में 150 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन होगा। शुभ मुहूर्त में युवा होलिका दहन करेंगे। इसके पूर्व महिलाएं पूजा-अर्चना करेंगी। होलिका दहन के बाद धुलेंडी पर रंग-गुलाल लगाकर होली का त्योहार मनाया जाएगा। पुलिस विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार जिलेभर में करीब 150 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन होगा। स्वच्छता के सदेश को पेड़ों नही काटने के इस सदेंश का पालन में कई स्थानों पर कंडों की होली' से प्रेरित होकर जिले में कई स्थानों पर कंडों की होली भी जलाई जाएगी। प्राचीन परंपराओं व मान्यताओं का निर्वहन करते हुए नाममात्र लकड़ी का उपयोग भी होगा। कंडों का प्रयोग अधिक होने से लकड़ियों के उपयोग में कमी आएगी, जिससे पेड़ों की कटाई रुकेगी। साथ ही पर्यावरण संतुलन की स्थिति भी निर्मि होगी। होली दहन के बाद को युवाओं की टोली रंग-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देगी।
कहां, कितने होलिका दहन
केंट 26बघाना 12सिटी 16जीरन 23 जावद 15 रतनगढ़ 10 सिंगोली 7 नयागांव 3
डीकेन 2मनासा 8 कुकड़ेश्वर 4 रामपुरा 8
होलिका दहन शुभ मुहूर्त 2020
होलिका दहन- सोमवार, 9 मार्च 2020
होलिक दहन शुभ मुहूर्त- शाम 6 बजकर 22 मिनट से 8 बजकर 49 मिनट तक
होलिक दहन अवधि- 2 घंटे
भद्रा पुंछा - सुबह 9 बजकर 50 मिनट से 10 बजकर 51 मिनट तक
भद्रा मुखा : सुबह 10 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 32 मिनट तक

नए अनाज से इसकी पूजा होती इसके बाद अगले दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा शुरू हो जाती है, जो पूर्णिमा के अनुसार नया साल का आरंभ है. इस दिन से हिंदू नववर्ष आरंभ होगा. होलिका दहन के अवसर पर पुराने वर्ष की बुराइयों का अंत कर नए शुभ वर्ष की शुभ कामना का पर्व भी है होली. इसलिए नए अनाज से इसकी पूजा होती है. रंग गुलाल लगाकर लोग खुशियां मनाते हैं. हिरण्यकश्यप की बहन होलिक जिसे आग में ना जलने का वरदान मिला था. प्रह्लाद को मारने के लिए अपने भाई के कहने पर उसने उसे गोद में लेकर बैठ गई. लेकिन भगवान की कृपा से वह खुद जल कर राख हो गई, लेकिन प्रह्लाद को आंच तक नहीं आई.

इस बार होली के दिन कई वर्षों के बाद एक विशेष संयोग इस साल होलिका दहन 9 मार्च को किय जाएगा जबकि 10 मार्च को रंग वाली होली खेली जाएगी। हिन्दू पंचांग के अनुसार, होलिका दहन हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है और इसके अगले दिन रंग वाली होली खेली जाती है।ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, इस बार होली के दिन कई वर्षों के बाद एक विशेष संयोग बन रहा है। इस संयोग को गजकेसरी योग कहा जा रहा है। गजकेसरी योग में ग्रह-नक्षत्र एक खाश दशा में होते हैं, जिसका विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ते हैं।ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, गज का अर्थ होता है हाथी और केसरी का अर्थ होता है शेर। ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि हाथी और शेर को राजसी सुख से जोड़कर देखा जाता है।ज्योतिष के जानकार बता रहे हैं कि इस बार लंबे अरसे बाद होली के दिन दो ग्रह अपनी ही राशि में रहेंगे। स्वराशि में रहने वाले ग्रह हैं गुरु और शनि। माना जा रहा है कि ऐसा होने से जातकों के जीवन में सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य में बढ़त होगी।दरअसल, होलिका दहन के दिन बृहस्पति ग्रह धनु राशि में और शनि मकर राशि में रहेंगे। बताया जा रहा है ऐसा संयोग लगभग 500 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 1521 में इस तरह के खास संयोग होली के दिन बना था।



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