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देश के जीडीपी में 3.70 लाख रुपए की वृद्धि हुई

विश्व की प्रमुख सलाहकार संस्थाओं में शुमार प्राइसवाटरहाउस कूपर्स के अनुसार इस साल भारत ब्रिटेन को पछाड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। दुनिया में सबसे तेजी से वृद्धि करने वाली अर्थव्यवस्था का तमगा भारत पहले ही हासिल कर चुका है। ये अनुमान देश की अर्थव्यवस्था में हुए उत्पादन के आधार पर व्यक्त किए गए हैं जिसे सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी कहते हैं। जीडीपी की गणना में केवल उत्पादन को ही मापा जाता है, लेकिन यह नहीं देखा जाता कि वह उत्पादन फायदे की सौगात बन रहा है या नुकसान का सबब। मान लें, कोई स्वस्थ व्यक्ति बीमार पड़ गया तो अर्थव्यवस्था में उसके द्वारा किया जाने वाला 1000 रुपए प्रतिदिन का उत्पादन कम हुआ और एक माह में जीडीपी 30,000 रुपए घट गया। वहीं दूसरी ओर उसकी सर्जरी के लिए चार लाख रुपए खर्च हुए। यह खर्च जीडीपी में जोड़ा जाता है। इस प्रकार एक व्यक्ति के बीमार पड़ने से देश के जीडीपी में 3.70 लाख रुपए की वृद्धि हुई। इसी तरह मान लीजिए कि वायु प्रदूषण बढ़ गया। लोगों को दूध खरीदने के बजाय प्रदूषण से बचने के लिए मास्क खरीदने पड़े। ऐसे में जीडीपी पूर्ववत रहेगा, पर लोगों का जीवन-स्तर गिर जाएगा। इस परिप्रेक्ष्य में हमें भारत के पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने को समझना चाहिए।
वर्ष 2019 में भारत का जीडीपी लगभग 3,000 अरब डॉलर होने का अनुमान है, जो ब्रिटेन के 2,900 अरब डॉलर के जीडीपी से अधिक होगा। अब देखना है कि यह जीडीपी किस प्रकार के माल के उत्पादन से हासिल हुआ है। विश्व आर्थिक मंच यानी डब्ल्यूईएफ द्वारा तैयार विश्व पर्यावरण सूचकांक में ब्रिटेन को 180 देशों में छठा स्थान दिया गया है, जबकि भारत लगभग सबसे नीचे 177वें स्थान पर है। इसका अर्थ हुआ कि ब्रिटेन में दूध का सेवन ज्यादा हो रहा है, जबकि भारत में एंटी-पॉल्युशन मास्क का। इसे यूं भी समझ सकते हैं कि वर्ष 2019 में ब्रिटेन में उनतीस सौ अरब डॉलर के दूध का सेवन होगा, जबकि भारत में तीन हजार अरब डॉलर के एंटी-पॉल्युशन मास्क की खपत होगी। लिहाजा हमें केवल बड़ी अर्थव्यवस्था बनने भर से संतुष्ट नहीं होना चाहिए। अर्थव्यवस्था को बड़ा बनाने वाला एक अन्य पहलू जनसंख्या भी है। ब्रिटेन की जनसंख्या लगभग सात करोड़ है और भारत की तकरीबन 136 करोड़।

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