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विनम्र अश्रुपूरित श्रद्धांजलि…….. अब नहीं तो, कब ? – राजेश मानव

गुरूवार की दोपहर में पुलवामा में जेश-ए-मुहम्मद ने जो कायराना हमला किया, उसको लेकर पूरा देश व्यथित है

सीआरपीएफ जिसकी जन्म स्थली ही नीमच है, के 49 जवान शहीद हो गये । सम्भवत: इनमें से कई जवानों ने नीमच में प्रशिक्षण भी लिया होगा । छुट्टी मना कर ड्यूटी पर लौट रहे थे, 2548 जवान थे, आतंकी 250 किलो विस्फोटक सामग्री स्कारपियो में भरकर जवानों के काफ़िले में घुसकर बस से टकरा गया, विस्फोट इतना भयानक था कि मौके पर ही जवानों के शरीर क्षतिग्रस्त हो गये और वीरगति को प्राप्त हुए । प्रधानमंत्री ने कहां कि आतंकियों के आकाओं ने बहुत बड़ी गलती कर ली है, उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे । लेकिन अब देश की आम जनता के सब्र की परीक्षा लेने का समय नहीं है । जनता चाहती है कि तत्काल “एक्शन का रियेक्शन” । ‘क्रिया की प्रतिक्रिया’ ईट का जवाब पत्थर से । सोश्सल मिडिया पर तरह-तरह के मेसेज आ रहे है, शहीदों के प्रति गहरी संवेदना तो आतंकियों के खिलाफ गहरा आक्रोश है । पूरा देश मोदीजी की ओर देख रहा है कि एक के बदले दस, बल्कि कुछ ऐसा कर दो कि “नापाक” ही न रहे । कांधार में झुकने का कितना बड़ा खामियाजा उठाना पड़ रहा है । 2001 में संसद पर हमला, पठानकोट, फिर उरी और अब पुलवामा में जो हुआ उसका जिम्मेदार मोलाना मसूद अज़हर है, जिसको जेल से रिहा कर कांधार छोड़ा था । अब आतंकियों को जड़ से उखाड़ फेंकने का समय आ गया है । ऐसे समय में विपक्षी पार्टी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि इस बारे में सरकार जो भी निर्णय लेगी हम साथ है । यह राजनीति से हटकर देशप्रेम को परिलक्षित करता है । कल उप्र में कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी की पत्रकारवार्ता थी, उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर वार्ता निरस्त कर दी । ऐसा ही कुछ नीमच में देखने को मिला जब पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन ने कृषि मेले में न जाकर शहीदों को मौन श्रद्धांजलि अर्पित की । दु:खद हादसे की सूचना पर सूरत में शादी के ताम-झाम निरस्त कर वह पैसा सैनिक कल्याण कोष को भेज दिया गया । कुछ लोगों ने भारत बंद का आव्हान किया, किसने किया यह तो पता नहीं, लेकिन कुछ व्यापारियों ने कहा कि बंद की बजाय कमाई की एक दिन की राशि सैनिकों के कल्याण कोष में जमा हो तो ज्यादा बेहतर है । प्रधानमंत्री ने भी देशवासियों से एक रुपये से लेकर अधिकतम सहयोग की अपील की हैं । वैसे भी बंद का कोई महत्व नहीं है, जिनके मन में श्रद्धा है वे मौन रहकर, प्रार्थना कर, सहायता कर और भी कई सेवा के प्रकल्प है, उसमें सहभागी बन सकते हैं, वरना बंद के दौरान पार्टी/टीवी वगैरा चलते रहेंगे ।एक बात जो मन को कचोट रही है कि हमारे गुप्तचर विभाग ने जब आठ फरवरी को लिखित सूचना देकर बता दिया था, तो इतनी बड़ी चूक कैसे हुई ? इसके लिये कौन जवाबदार है ? इसकी जवाबदेही तय की जाना चाहिये । खास मुख्य मुद्दे की बात तो एक ही है कि इन सब दुष्कृत्यों के पीछे पाकिस्तान है, उसके नापाक इरादों को नेस्तनाबूत करने का सही समय है, इस समय भारत जो भी करेगा उसका विपक्ष सहित पूरा देश और विश्व समर्थन करेगा । बस आवश्यकता है तो इच्छा शक्ति की, केवल यह कहने से काम नहीं चलेगा कि पूरी छूट दे दी है । कर गुजरने का वक्त है, काश्मीर से आतंकियों को जड़ मूल से हटाना होगा । धारा 370 समाप्त कर देने का भी सही समय है । मोदीजी अगर अब भी केवल बातें ही करते रहे तो देश उन्हें कभी माफ नहीं करेगा । किसी ने कहा- “हे प्रभु मुझे आज माफ करना आज फूल शहीदों पर चढ़ने के लिये बेताब है ।” विनम्र अश्रुपूरित श्रद्धांजलि । -राजेश मानव 

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