क्या बंगला बगीचावासी संतुष्ट नहीं व्यवस्थापन प्रक्रिया से

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नीमच,29 जनवरी(अब्दुल हुसैन बुरहानी)। शहर में लगभग 70 वर्षों पुरानी बंगला बगीचा समस्या को हल करने की दिशा में कदम उठाते हुए मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इसके मसौदे को कैबिनेट से हरी झंडी दे दी एवं उसका गजट नोटिफिकेशन भी हो गया।
धीमी रफ्तार से चल रही व्यवस्थापन प्रक्रिया
देखने में यह आ रहा है कि व्यवस्थापन प्रक्रिया काफी धीमी रफ्तार से चल रही है ।व्यवस्थापन बोर्ड के पीठासीन अधिकारी एसडीएम श्री क्षितिज शर्मा बीच-बीच में जरूर प्रकरणों की सुनवाई की गति बढ़ाने का प्रयास करते हैं,मगर वर्क लोड अधिक होने से वह सफल नहीं हो पाते।
एक माह में बंगला वासियों को हक देने के लिए गए थे दावे,1 वर्ष बाद भी कार्य काफी अधूरा
गजट नोटिफिकेशन होने के बाद व्यवस्थापन प्रक्रिया 1 माह में पूर्ण करके बांग्ला वासियों को उनके हक देने के दावे किए गए थे,मगर इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि एक वर्ष से अधिक समय हो चुका है,मगर अब तक कुल जमा 1350 आवेदनों में से सिर्फ 477 आवेदनों की प्रक्रिया पूर्ण होकर उनका परिषद से अनुमोदन हुआ है।अत: इन आंकड़ों से सहसा ही अंदाजा लगाया जा सकता है,कि शेष आवेदनों की सुनवाई एवं अन्य प्रक्रिया पूर्ण करने में अभी कितना अधिक समय लगेगा?
व्यवस्थापन के तहत शुल्क के रूप में अब तक इतनी राशि जमा हो चुकी है नपा के कोष में
व्यवस्थापन प्रक्रिया के कार्यों में सहायक की भूमिका निभाने वाले सक्रिय कर्मचारी सत्येंद्र यादव के द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार अब तक व्यवस्थापन के तहत 413 प्रकरणों में नपा के कोष में तकरीबन 2 करोड़ 68 लाख 26 हजार 507 रुपए की राशि जमा हो चुकी है, जिसमें प्रीमियम,वार्षिक लीजरेंट,निर्माण अनुमति शुल्क,शास्ति,विकास शुल्क, अधिभार आदि मदें शामिल है।
व्यवस्थापन प्रक्रिया से खुश नहीं बंगलावासी,अब नजरें नई कांग्रेस सरकार की और
वर्तमान में जिस प्रकार बंगला बगीचा व्यवस्थापन चल रहा है जिसके तहत लगभग 3350 वितरित आवेदनों से केवल 1350 के लगभग आवेदन बंगला वासियों ने जमा करवाए हैं।इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि बंगलावासी इस इस समाधान से संतुष्ट नहीं हैं, उनमें व्यवस्थापन प्रक्रिया के समाधान को लेकर कोई उत्साह नहीं है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक जिन आवेदकों ने फॉर्म जमा करवाए हैं उनमें से अधिकांश 1000 वर्ग फीट से लेकर 2000 वर्ग फीट वाले यानि छोटे बंगलावासी हैं,बड़े बंगला वासी इस व्यवस्था से कतई संतुष्ट नहीं है।अब राज्य में कांग्रेस की सरकार काबिज होने के बाद इस उम्मीद में है कि शायद कमलनाथ सरकार इस मसौदे में सरलीकरण एवं संशोधन कर उन्हें राहत प्रदान करेगी।अब देखना है कांग्रेस सरकार इसके तहत शहर के बंगला वासियों के लिए क्या सौगात प्रधान कर पाती है?।
आपसी नूराकुश्ती में इस योजना को पलीता लगा रहे भाजपा के जिम्मेदार
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी ने तत्परता दिखाते हुए इस समस्या को हल किया,किन्तु देखने में आ रहा है,कि स्थानीय अधिकारी एवं इससे जुड़े जिम्मेदार आपसी गुटबाजी एवं राजनीतिक नूरा कुश्ती के चलते श्रेय लेने की होड़ा-होड़ी के चक्कर में इस कार्य को लटका रहे हैं,लेट लतीफी कर रहे हैं जिसके चलते आम जनता इनके बीच पिस रही है।
मुख्यमंत्री की इस योजना को पलीता लगाया जा रहा हैं,उसे असफल करने में लगे हैं।

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